मंगलवार को पब्लिक एग्जामिनेशन संशोधन बिल 2026 पर सदन में चर्चा शुरू हुई. छात्रों के देशव्यापी प्रदर्शन के बाद इस बिल को सदन के पटल पर रखा गया है. इस बिल को लाने का मकसद पेपर लीक से जुड़े कानून को और मजबूत करना है, साथ ही जवाबदेही के अलावा सजा को कड़ा करना है, जिससे आने वाले समय में पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या को खत्म करने की कोशिश की जा सके. इस बिल को लाने का मकसद दो साल पुराने कानून को संशोधित कर जेल की सजा और जुर्माने को बढ़ाना है. साथ ही जांच और केस की समयसीमा को तय करना है. देश के केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने बिल को विचार के लिए पेश किया है. उन्होंने इस बिल को स्टूडेंट और युवाओं के कल्याण की रक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता के तौर पर दर्शाया है. उन्होंने कहा है कि इस कानून को और सख्त बनाने के लिए लाया जा रहा है.
जानें नए बिल में किस तरह के प्रावधान हैं?
जिस कानून में सरकार संशोधन कर रही है, उसका नाम पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) एक्ट 2024 में पारित किया गया था. इसे कई पेपर लीक की घटनाओं के बाद जून में लागू भी कर दिया था. इसमें 15 कैटेगिरी में क्राइम को रखा गया है. इनमें प्रश्न पत्र यानी Question Paper और आंसर शीट लीक करने जैसी वेबसाइट चलाना शामिल था. इनके अलावा व्यक्तियों, परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियां और उनके सीनियर अधिकारियों के लिए अलग-अलग स्तर पर सजाएं तय की गई थीं.
संशोधित बिल कानूनी स्तर पर सजा को बढ़ाता है
इनके अलावा कानून में बिना वारंट गिरफ्तारी, गैर जमानती और गैर समझौता योग्य जैसे नियम रखे गए थे. कैंडिडेट्स को इस कानून से बाहर रखा गया था. साथ ही संशोधन में भी इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है. 2026 में लाया गया बिल भी कानूनी स्तर पर सजा को बढ़ाता है. इनके इस संशोधित बिल के तहत अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने का दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के लिए जेल की कम से कम सजा तीन साल से बढ़कर पांच साल, अधिकतम सजा पांच साल से बढ़कर 10 साल और जुर्माने की अधिकतम सीमा 10 लाख से बढ़कर 50 लाख कर दी जाएगी.
सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों पर लगेगा 1 से 5 करोड़ का जुर्माना
इसके अलावा बिल में सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों पर 1 करोड़ के बजाय 5 करोड़ का जुर्माना लगेगा. उन्हें सार्वजनिक परीक्षा के काम से चार साल के बजाय आठ साल के लिए बैन कर दिया जाएगा. इसके अलावा पेपर लीक मामले से जुड़े व्यक्तियों, समूहों या संस्थानों के मामले में कम से कम सजा पांच साल से बढ़कर सात साल हो जाएगी. जुर्माना भी 10 करोड़ तय किया जाएगा.इस बिल में हर प्रक्रिया की समय सीमा भी तय की गई है. इनमें दो नई धाराएं 12A और 12B जांच के लिए दो महीने की समय सीमा तय करते हैं. यह तय समय सीमा उस समय से शुरू होगी, जब केंद्र मामला सौंपती है. इसमें चाहे केंद्रीय जांच एजेंसी को जांच सौंपी जाए या किसी स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा. स्पेशल टास्क फोर्स इस संशोधित बिल के साथ ही जांच में नए तरीके को जोड़ता है.
फास्ट ट्रैक कोर्ट को मिलेगी कानूनी मान्यता
2024 में फास्ट ट्रैक कोर्ट को नहीं जोड़ा गया था. अब इस संशोधित बिल के तहत कानूनी मान्यता दी जाएगी. इसके लिए राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को हाईकोर्ट की सलाह से इस कानून के तहत अपराधों की सुनवाई के लिए सेशन कोर्ट बनाना होगा. कार्यवाही रोजना होगी. चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरे करने होंगे. अपील हाईकोर्ट में की जा सकेगी. इसमें दो जजों की बेंच मामले का निपटारा करेगी. साथ ही तीन महीने के भीतर पूरे मामले को निपटाना होगा.
